प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव – तपकरा
चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया दिनांक 21 मार्च 2026, शनिवार को तपकरा बाजार टांड़ में "Sunrise Indigenous Social Cultural Heritage" (SISCH) ट्रस्ट के सौजन्य से युवा सरना समिति, तपकरा द्वारा आदिवासियों का सबसे बड़ा पर्व प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव का भव्य आयोजन हर्षोल्लास, पारंपरिक रीति-रिवाज एवं सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया गया।
सरहुल आदिवासी समाज का एक महत्वपूर्ण प्रकृति एवं सांस्कृतिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आदर, पेड़-पौधों एवं पर्यावरण के संरक्षण, सामाजिक एकता और सामुदायिक सद्भाव का संदेश देता है। सरहुल के माध्यम से आदिवासी समाज प्रकृति और मानव जीवन के बीच के गहरे संबंध को सम्मान देता है तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत से जोड़ने का प्रयास करता है।
🙏 मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में माननीय विधायक श्री सुदीप गुड़िया जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि जीतू पाहन, लुथड़ू मुंडा, जयराम गुड़िया (पाहन), सुशीला कन्डुलना, रोशनी गुड़िया (मुखिया), जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया जी के आगमन से आयोजन समिति, युवाओं एवं उपस्थित ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने सरहुल पर्व की शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति, संस्कृति, सामाजिक एकता और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 07:00 बजे बाइक रैली से हुई। युवाओं ने उत्साहपूर्वक बाइक रैली में भाग लेकर सरहुल पर्व के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। रैली के माध्यम से युवाओं ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
यह बाइक रैली विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी और अपनी संस्कृति के प्रति उनके जुड़ाव का प्रतीक रही।
🌳 10:00 से 11:00 बजे तक पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार तपकरा पाहन कंदना भगत के द्वारा सखुआ डाली लाकर सृष्टिकर्ता सिङबोंगा की पूजा-अर्चना की गई। सरहुल पर्व में प्रकृति और सृष्टि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना विशेष महत्व रखता है।
पूजा-अर्चना के माध्यम से समाज की सुख-शांति, समृद्धि, अच्छी वर्षा, अच्छी फसल तथा प्रकृति के संतुलन की कामना की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने अपनी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त किया।
11:00 बजे से 15:00 बजे तक सरहुल पर्व के शुभ संदेश के साथ विभिन्न पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
पारंपरिक वेशभूषा में महिला, पुरुष एवं युवाओं ने सामूहिक रूप से नृत्य प्रस्तुत कर आदिवासी संस्कृति की सुंदरता और विविधता को प्रदर्शित किया। मांदर एवं अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों से पूरा वातावरण सरहुल की उमंग और उल्लास से भर गया।
इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, लोकनृत्य, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में 15:00 से 16:00 बजे तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य-संगीत और सांस्कृतिक प्रतीकों से सुसज्जित शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को आकर्षक एवं उत्सवमय बना दिया।
शोभायात्रा के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम का सफलतापूर्वक एवं हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ।
🌱 कार्यक्रम का उद्देश्य एवं संदेश
इस सरहुल महोत्सव का मुख्य उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम ने विशेष रूप से यह संदेश दिया कि—
प्रकृति हमारी जीवनदायिनी है, इसलिए उसका संरक्षण हमारा दायित्व है।
अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
युवाओं की सक्रिय भागीदारी से सांस्कृतिक परंपराओं को और मजबूत किया जा सकता है।
समाज में एकता, भाईचारा और आपसी सहयोग बनाए रखना आवश्यक है।
आदिवासी संस्कृति और परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पहचान भी हैं।
🌿 निष्कर्ष
तपकरा बाजार टांड़ में आयोजित सरहुल महोत्सव ने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। "Sunrise Indigenous Social Cultural Heritage" (SISCH) ट्रस्ट के सौजन्य एवं युवा सरना समिति, तपकरा के आयोजन में युवाओं, ग्रामीणों एवं समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सफल बनाया।
यह आयोजन आदिवासी समाज की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा, प्रकृति के प्रति आस्था और सामाजिक एकजुटता का सशक्त उदाहरण रहा तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में याद किया जाएगा।
Event Venue
Name
Tapkara, khuntiLocaiton
Tapkara+18274737136
7061075711Event Expired